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Definitional Dictionary of Surgical Terms (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Vagina

योनि
मादा प्राणियों में जनन कक्ष से निकलता अण्डमार्ग का एक भाग जो यकृत अंडवाहिनी के पीछे होता है। स्तनियों में गर्भाशय से भग तक जाने वाली जनन नाल।

Vagotomy

वेगसछेदन
वेगस तंत्रिका का विभाजन करना। ग्रहणी व्रण (deodenal ulceration) की चिकित्सा के रूप में इस ऑपरेशन को किया जाता है क्योंकि ऐसा करने से आमाशय में निकलने वाला अम्लस्राव (acid secretion) कम हो जाता है और साथ ही आमाशय को जाने वाली प्रेरक तंत्रिका (motor nerve) भी समाप्त हो जाती है। इसके अतिरिक्त वेगस छेदन के साथ-साथ एक निकास ऑपरेशन (जैसे जठर-मध्यान्त्र सम्मिलन) आमतौर पर किया जाता है।

Valvotomy

कपाटिकाछेदन
कपाटिका का छेदन (incision) करना, जैसा कि हृदय की माइट्रल कपाटिका में संकीक्रणता (stenosis) होने पर किया जाता है।

Valvuloplasty

कपाटिका संधान
संधान शस्त्रकर्म द्वारा हृदय की रोगग्रस्त कपाटिका का विरोहण अथवा मरम्मत करना।

Varicose Vein

अपस्फीत शिरा
शिराओं (नीले रक्त की नलियां) का फैल जाना तथा घुमावदार या कुटिल (tortuous) हो जाना. ये शिरायें आमतौर पर पैरों (निम्न शाखा) की होती हैं। इसका कारण पैदायशी या बाद में होने वाला (अर्जित) हो सकता है। आमतौर पर ऐसी हालत में कोई लक्षण नहीं मिलता, लेकिन उपद्रव (complication) भी हो सकते हैं, जैसे अपस्फीत शिरा व्रण (varicose ulcer), शोथ (सूजन) तथा रक्त स्राव। इसका इलाज, लक्षणों के अनुसार ऑपरेशन द्वारा किया जाता है।

Variococele

शिरावृषण
प्रतानाकार शिरा-जालिका (pampiniform plexus) की अपस्फीति (फूल जाना), जो आमतौरपर बायीं वृषण रजजु (spermatic cord) में देखने को मिलती है। इस हालत का कोई कारण नहीं पाया जाता, पर कभी-कभी बायीं तरफ को श्रोणि या वृक्क में अर्बुदों के साथ-साथ यह अवस्था पाई जाती है। इस रोग की चिकित्सा लक्षणों के अनुसार की जाती है और उपद्रव होने पर ऑपरेशन किया जाता है।

Vasectomy

शुक्रवहा-छेदन
शस्त्रकर्म द्वारा शुक्रवहा का छेदन करना। यह ऑपरेशन आमतौर पर बंध्यता (sterility) के रोगियों में शुक्रवहा (vas defferens) की विवृतता (patency) (अर्थात् वह खुली है या नहीं) को देखने के लिए किया जाता है।

Vasovasotomy

वाहिका-वाहिका-सम्मिलन
शस्त्रकर्म द्वारा शुक्रवाहिका के रुके हुए तथा विवृत सिरों (patent ends) का सम्मिलन (anastomosis) करना। यह ऑपरेशन आमतौर पर शुक्रवहा-उच्छेदन या शोथज अवस्था के कारण शुक्रवहा के संतता (continuity) को स्थापित (establish) करने अथवा नली को खोलने के लिये किया जाता है।

Vein

शिरा
शरीर के विभिन्न अंगों से रूधिर को हृदय की ओर ले जाने वाली नलिकाकार वाहिका।

Velpeau’S Bandage

वेल्प्यू पट्टी, स्थिरीकरण पट्टी
प्रगंडास्थिभग्न में, स्थिरीकरण के लिए, स्कन्ध एवं अंस दोनों को बांधने वाली।

Venous Blood

सिरागत रक्त
सिरा में बहने वाला रक्त।

Ventriculitis

मस्तिष्क निलय शोथ
मस्तिष्क (brain) के निलय (ventricle) का शोथ।

Ventriculo-Atrial Or Ventriculoatriostomy

वैंटीकुलोएट्रिऑस्टोमी
मस्तिष्क के पार्श्व निलय (lateral ventricle) तथा हृदय के दक्षिम अलिंद (right atrium) के बीच शस्त्रकर्म द्वारा एक मार्ग (passage) बनाना। यह ऑपरेशन जलशीर्ष (hydrocephaly) रोग में आराम पहुंचने के लिये किया जाता है।

Ventriculocordectomy

वैंट्रीकुलोकॉर्डेक्टोमी
स्वरयंत्र (larynx) के संकरेपन तथा साथ में दोनों तरफ की पुनरावर्ती स्वरतंत्र तंत्रिकाओं (recurrent laryngeal nerve) के घात (paralysis) के होने पर किया जाने वाला शस्त्रकर्म।

Ventriculocy-Sternostomy

मस्तिष्कनिलय-कुंड-सम्मिलन
शस्त्रकर्म द्वारा मस्तिष्क के तृतीय निलय (third ventricle) तथा अन्तरावृंत कुंड (cisterna intrpeduncularis) के बीच संचार की व्यवस्था का स्थापन करना है। यह ऑपरेशन आभ्यन्तर जलशीर्ष (internal-hydrocephalus) के रोगियों में किया जाता है।

Ventriculo-Mastoidostomy

मस्तिष्क निलय-कर्णमूल पथ
प्राथमिक और द्वितीयक जलशीर्ष (hydro-cephalus) के रोगियों में मस्तिष्क में प्रमस्तिष्क-मेरु तरल (CSF) के निकास की स्थापना करने हेतु मस्तिष्क निलय तथा कर्णमूलास्थि कुहर के मध्य एक पथ बनाने हेतु शल्यकर्म।

Vertebra

कशेरूक
रीढ़ या कशेरूक दण्ड बनाने वाली अनेक छोटी छोटी अस्थियों या उपास्थियों में से एक। प्रत्येक कशेरूक में प्रायः एक सेन्ट्रम एक तंत्रिका नाल जिसमें होकर मेरूरज्जु निकलती है और कई प्रवर्ध होते हैं।

Vesical Calculus

मूत्राशय अश्मरी
मसाने (मूत्राशय) में पथरी बन जाना। पथरी प्राथमिक (primary) या द्वितीयक (secondary) हो सकती है। प्राथमिक पथरी मूत्राशय में बनती है जबकि द्वितीयक पथरी गुर्दे (वृक्क-kidney) से गवीनी (ureter) द्वारा मसाने में पहुँचती है पथरी प्रायः तीन प्रकार की होती है। (1) ऑक्सिलेट, (2) यूरिक एसिड तथा (3) फास्फेट। प्राथमिक पथरी के सामान्य कारण संक्रमण (infection) तथा समाने में पहुंचने वाले आगन्तुक शल्य (foreign body) हैं, चाहे वह मूत्र पथ द्वारा निकलने वाले मूत्र को रोकते हों या न रोकते हों। इस बीमारी के लक्षणों में पेशाब करते समय भयंकर पीड़ा, जो मूत्रमार्ग (urethra) के आखिरी हिस्से तक पहुंचती है, रक्तमेह (पेशाब के साथ खून का आना-haematuria), पेशाब का रुक जाना, जो अस्थायी होता है आदि शमिल है। इसका इलाज ऑपरेशन है। छोटी छोटी पथरियाँ बिना किसी लक्षण के पेशाब के साथ निकल जाती हैं।

Vesiculectomy

शुक्राशय-उच्छेदन
शुक्राशय (seminal vesicle) का उच्छेदन (excision) करना अर्थात् उसे काटकर निकाल देना।

Vesiculotomy

शुक्राशय-छेदन
शुक्राशय को छेदन (incision) करना अर्थात् उसे काटना या उसमें चीरा लगाना।
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